शनिवार, 21 दिसंबर 2024

कौन हैं आम्बेडकरद्रोही? आइए, बाबा साहब की छलनी आत्मा से पूछते हैं…!

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By Jayjeet Aklecha

डॉ. आम्बेडकर के मसले पर ‘नूरा कुश्ती’ के साथ आखिर सदन की कार्यवाही स्थगित हो गई। उम्मीद है देश ने राहत की सांस ली होगी!
देश के दो प्रमुख राजनीतिक 'सम्प्रदायों' के बीच सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा यही थी कि स्वयं को आम्बेडकर का भक्त ठहराकर दूसरे पक्ष को आम्बेडकरद्रोही साबित किया जा सके...
कौन कितना आम्बेडकर द्रोही है, यह जानने के लिए ये चंद पंक्तियां पढ़ते हैं। लोकसभा के पूर्व महासचिव और जाने-माने संविधान विशेषज्ञ सुभाष सी. कश्यप से आज से तीन साल पहले 6 दिसंबर 2021 को आम्बेडर की पुण्यतिथि पर ये शब्द कहे थे: "अगर आज डॉ. बीआर आम्बेडकर जीवित होते तो यह देखकर उनकी आत्मा छलनी हो जाती कि आज भी अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को आरक्षण की जरूरत है।’
आज 75 साल के बाद एक सियासी सम्प्रदाय जो करीब 50 साल सत्ता में रहा, संविधान बचाने के नाम पर ‘आरक्षण’ का सबसे बड़ा पैरोकार होने का दावा कर रहा है, करता आ रहा है।
दूसरा सियासी सम्प्रदाय बार-बार इस बात की गारंटी देते नहीं थकता कि इस देश से आरक्षण कभी खत्म नहीं होगा ("मोदी की गारंटी है कि एससी, एसटी, ओबीसी का आरक्षण खत्म नहीं होगा।" - नरेंद्र मोदी,अप्रैल 2024, टोंक-सवाईमाधोपुर की रैली में)। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि आम्बेडकर ने आरक्षण के प्रावधान को रखते हुए स्पष्ट कहा था कि इसका विस्तार SC/ST समुदायों से परे नहीं होना चाहिए।
सुभाष कश्यप की अपनी युवावस्था के दौरान संसद की लाइब्रेरी में आम्बेडकर के साथ कई बार मुलाकातें और उनके साथ आरक्षण को लेकर चर्चाएं भी हुई थीं। साल 2021 के भाषण में कश्यप ने ऑम्बेडकर के हवाले से कहा था- “डॉ. आम्बेडकर ने एससी और एसटी के लिए आरक्षण के संदर्भ में कहा था कि 10 साल का समय बहुत कम है और इसे 40 साल होना चाहिए। लेकिन उसके बाद संसद को कानून द्वारा आरक्षण को बढ़ाने का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए। वे स्थायी रूप से आरक्षण के खिलाफ थे।” ऑम्बेडकर ने यह भी कहा था, “मैं नहीं चाहता कि वह प्रतीक भारतीय समाज में हमेशा के लिए बना रहे।” (द हिंदू, 6 दिसंबर 2021)
मेरा एक ही सवाल है : जो भी सियासी सम्प्रदाय एक-दूसरे पर आम्बेडकर के अपमान के लिए अंगुली उठा रहा है, वह बची हुई तीन उंगलियां भी देख लें। वे उनके स्वयं के गिरेबान की ओर आ रही हैं... 40 साल के बाद भी आरक्षण जारी है। क्यों जारी है? आम्बेडकर का अनुचर साबित करने से पहले उनकी आत्मा को इसका जवाब भी तो दे दीजिए!!
पर बड़ा सवाल यह भी है : पिछले लोकसभा चुनाव में जिन 66 करोड़ लोगों ने जिस भी सियासी सम्प्रदाय को वोट दिए, वे धर्म और जाति से परे हटकर उनसे महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, इनोवेशन की कमी जैसे मसलों पर सवाल पूछना कब शुरू करेंगे? सवाल केवल आरक्षण के हटाने या ना हटाने का नहीं है। सवाल यह है कि जिस आरक्षण की भूमिका देश के कुल वर्क फोर्स में डेढ़ फीसदी भी नहीं है, उसके नाम पर हम कब तक मूर्ख बनते और बनाए जाते रहेंगे?

(Jayjeet Aklecha, जयजीत अकलेचा, Dr. BR Ambedkar)

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2024

इलॉन मस्क - भविष्य के वास्तुकार : एक लीजेंड की ज़िंदगी का एनालिसिस


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 * विश्वदीप नाग

अपनी उद्यमशीलता से जुड़े कीर्तिमानों और विवादास्पद बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले इलॉन मस्क दुनिया की सबसे चर्चित हस्तियों में गिने जाते हैं। उनके विराट और रहस्यमय व्यक्तित्व और उनकी जीवन यात्रा को समझना आसान नहीं है। टेस्ला और स्पेसएक्स जैसी अरबों डॉलर की कंपनियों के शिल्पकार के रूप में वे दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। 2022 में, उन्होंने ट्विटर को ख़रीदने की बोली के साथ दुनियाभर में सुर्खियाँ बटोरी थीं। दक्षिण अफ़्रीका की अपनी जड़ों से आगे जाकर मस्क ने अपने लिए काफ़ी नाम कमाया है।

दक्षिण अफ़्रीकी पत्रकार और लेखक माइकल व्लिसमस ने  'इलॉन मस्क: रिस्किंग इट ऑल' में कामयाबी की जीवंत किंवदंती बन चुके इस व्यक्तित्व की सच्ची कहानी का सिलसिलेवार वर्णन प्रस्तुत किया है। मंजुल पब्लिशिंग हाउस ने 'इलॉन मस्क : भविष्य के वास्तुकार'  शीर्षक से इसका हिंदी अनुवाद प्रकाशित किया है।  गहन शोध के बाद लिखी गई यह आकर्षक किताब कई मिथकों को दूर करती है तथा मस्क के पिता से जुड़े विवाद के अन्य पक्षों को भी प्रस्तुत करती है।  
 
व्लिसमस अन्य जीवनीकारों से अलग
व्लिसमस उन अन्य जीवनीकारों से अलग हैं, जिन्होंने मस्क के पीछे छिपे विशाल व्यक्तित्व को समझने की कोशिश की है। व्लिसमस के बारे में ख़ास बात यह है कि मस्क और उन्होंने प्रिटोरिया में एक ही स्कूल में पढ़ाई की है। लिहाज़ा, व्लिसमस उस माहौल को अच्छी तरह से जानते हैं, जिसने मस्क की जीवन यात्रा और कामयाबी  को आकार दिया।

 यह जीवनी इसलिए इतनी समृद्ध है, क्योंकि इसमें  मस्क को व्यक्तिगत रूप से जानने वाले और दक्षिण अफ़्रीका में उनके प्रारंभिक वर्षों का हिस्सा रहे लोगों के प्रत्यक्ष अनुभवों को समाविष्ट किया गया है, जो इस सवाल का जवाब देने की कोशिश करती है:  मस्क वास्तव में हैं कौन?

दुर्लभ जानकारी
व्लिसमस ने अपने अनुभवों को मस्क के बचपन के दोस्तों, शिक्षकों और परिचितों के अनुभवों के साथ मिलाकर 1980 के दशक में दक्षिण अफ़्रीकी शिक्षा प्रणाली की तस्वीर पेश की है। यह एक ऐसी दुनिया थी, जिसमें समझौता न करने वाला अनुशासन, सामाजिक विभाजन, नस्लीय तनाव और हिंसक उत्पात शामिल थे।

यह जीवनी मस्क के बचपन के दिनों की खोज है, जैसा कि वास्तव में वहाँ मौजूद लोगों ने बताया।  व्लिसमस पाठकों को मस्क के शुरुआती वर्षों के बारे में दुर्लभ जानकारी प्रदान करते हैं, इससे पहले कि युवा मस्क आज के उद्योग जगत के विवादास्पद बादशाह  बन गए, जिसके लिए उन्होंने सब कुछ जोखिम में डाल दिया और अपनी तक़दीर ख़ुद लिख दी।

जीवनी यह पड़ताल करती है कि मंगल ग्रह पर बसने की भव्य योजनाओं की बात करने वाले इस नवाचारी धन्नासेठ की दृष्टि के केंद्र में क्या है? वे जोखिम से इतना बेखौफ़ क्यों हैं? अजीबोगरीब प्रिटोरिया स्कूली लड़के के रूप में  कॉमिक्स और विज्ञान कथाएँ पसंद थीं, लेकिन उनके शुरुआती साल और पारिवारिक पृष्ठभूमि उनकी शानदार महत्वाकांक्षाओं को आकार देने में किस प्रकार महत्वपूर्ण थे ? मस्क के विकास बारे में लेखक नई अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं, जिसमें पिता के साथ उनके परेशान रिश्ते भी शामिल हैं।

विलक्षण हस्ती का बख़ूबी चित्रण
यह कृति मस्क के दक्षिण अफ़्रीकी बचपन से लेकर 17 साल की उम्र में कैनेडा और फिर अमेरिका जाने तक, उनके उल्लेखनीय जीवन का पता लगाते हुए एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है,  जो मानवता में आशावाद को बनाए रखने और ‘सितारों के बीच’ मनुष्यों के लिए भविष्य खोजने की दिशा में प्रेरित है। इसमें उनकी व्यावसायिक उपलब्धियों के साथ-साथ, उनके निजी जीवन के भी अनेक क़िस्से हैं, चाहे वह मॉडल और गायकों के साथ उनके संबंध हों, या बच्चों के दिलचस्प नाम। मस्क बहुत ही विलक्षण व्यक्ति हैं, यह जीवनी इसे बख़ूबी चित्रित करती है।

शानदार अनुवाद
अँग्रेज़ी में लिखी गई मूल कृति के हिंदी संस्करण की ख़ासियत इसका शानदार अनुवाद है, जो वरिष्ठ पत्रकार जयजीत अकलेचा ने किया है। वे शाब्दिक अनुवाद से बचे हैं और उन्होंने इसकी सुबोधगम्यता को क़ायम रखा  है। इसकी वजह से जीवनी का हिंदी अनुवाद बेहद पठनीय हो गया है।    

( समीक्षक वरिष्ठ पत्रकार हैं , संपर्क  - 62607 74189)


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